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स्वास्थ सुविधा के नाम पर बिहार भी हो रहल बा फेल , छपरा के एसएनसीयू में एक साल में लगभग 200 बच्चा लोग के मौत

सारण. लगभग 40 लाख के  आबादी वाला  सारण जिला में नवजात बच्चा लोग खातिर  स्थापित एसएनसीयू (SNCU) नाकाफी साबित हो रहल बा . पिछलका दु  साल में अभी तक एहिजा  382 बच्चा लोग के मौत हो चुकल बा जबकि एहिजा  4000 बच्चा लोग के  भर्ती करावल गईल रहे . विभाग भी इहे  मानत बा  कि एसएनसीयू में कम क्षमता के चलते  समस्या आ रहल बा . छपरा सदर अस्पताल में स्थापित एसएनसीयू खाली  12 बेड के बा  जवन कि 40 लाख के  आबादी वाला  सारण जिला खातिर  नाकाफी बा .

12 बेड वाला अस्पताल में बा 3 बेड खराब

वर्तमान में एहिजा 12 बेड में तीन बेड खराब बा जवना के  लंबा  समय से ठीक नईखे कईल गईल , यानी वर्तमान में सिर्फ एहिजा  नौ बच्चा लोग के  ही  भर्ती लिहल जा रहल बा  . अगर एसएनसीयू के आंकड़ा के  बात कईल जाव तब एहिजा बीतल दु साल में  4082 बच्चा  भर्ती करावल गईल बाड़े  जईमें 1300 बच्चा लोग के  रेफर कईल गईल बा . 2600 बच्चा लोग एहिजा से  स्वस्थ होके  लौटल बा  लेकिन 382  बच्चा लोग के  मौत हो गईल बा . विभाग के अनुसार प्रति हजार 30 नवजात बच्चा लोग के  मौत सारण जिला  में हो रहल बा बाकिर  एसएनसीयू से जवन आकड़ा  मिलल उ कुछु औरे कहानी  बता रहल बा .

का कह रहल बाड़े सिविल सर्जन


382 बच्चा लोग  के मौत के ऐह आकड़ा  में उ बच्चा  शामिल नईखन जवन की  निजी अस्पताल में चल गईल बाड़े काहे से की  छपरा के एसएनसीयू में सीट खाली ना रहेला . छपरा के सिविल सर्जन मधेश्वर झा भी मानत बाड़े कि छपरा सदर अस्पताल के एसएनसीयू के  क्षमता काफी कम बा  साथ ही स्टाफ के  कमी भी ऐह एसएनसीयू के क्षमता के  प्रभावित कर रहल बा . 12 में से 3 मशीन के खराब होखला  के  बात के  सिविल सर्जन माधवेश्वर झा भी स्वीकार करत जल्दीए दुरुस्त करावे के  बात कह रहल बाड़े  .





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