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नानी की आगे ननीअउरे के बखान

कहावत

1. का राम की घरे रहले आ का राम की बने गइले।

अर्थ- अनुपयोगी व्यक्ति। अयोग्य व्यक्ति।

2. सब रामायन बीती गइल, सीता केकर बाप।

अर्थ- कवनो बात निमन से समझावला के बादो बार – बार  मूर्खतापूर्ण प्रश्न कईल ।

3. रो रो खाई,धो धो जाई।

अर्थ- भोजन हमेशा प्रसन्न मन से करे के चाही । अप्रसन्न मन से कईल  भोजन शरीर के  लाभ  ना पहुँचावेला ।

4 . भगवान के भाई भइल बारअ।

अर्थ- कवनो काम के काल्ह के बहाने ना टाले के चाही ।

5. भइंस पानी में हगी त उतरइबे करी।

अर्थ- मन में राखल बात भी सामने आ जाला । सच्चाई छिप नईखे  सकत ।

6. सोने के कुदारी माटी कोड़े के हअ।

अर्थ- सब केहू के अपना  योग्यतानुसार काम कईल  अच्छा रहेला ।

7. .जे गुड़ खाई उ कान छेदाई।

अर्थ- गलत काम के  परिणाम कबो गलते होला ।

8..कमजोर देही में बहुत रीसि होला।

अर्थ- कमजोर व्यक्ति के  बात-बात पर गुस्सा आवेला ।

9 .बिन घरनी,घर भूत के डेरा।

अर्थ- औरत से ही घर,घर लागेला ।

10 .मान त  देव नाहीं त  पत्थर।

अर्थ- विश्वास ही सबकुछ होखेला ।

11.की हंसा मोती चुने,की भूखे मर जाय।

अर्थ- शेर जब भी खाई तब  मांसे  ही खाई । कहे के मतलब बा कि कुछ व्यक्ति परेशानी उठा लिहे बाकिर अपना वसूल यानि मान-मर्यादा के खिलाफ ना  जईहे ।

12 .सब धान बाइसे पसेरी।

अर्थ- सब एक जईसे ।

13 .दादा कहने सरसउवे लदीह ।

अर्थ- लकीर के फकीर।

14 .सइंया भये कोतवाल,अब डर काहे का।

अर्थ- अपने शासन में आपन मनमर्जी । यानि जेकर  लाठी ओकर  भईस ।

15 .बाप ओझा अउरी माई डाइन।

अर्थ- विरोधाभास। एक आदमी निमन त एक आदमी बाउर ।

17 .रोजो कुँआ खोद  अउरी रोजो पानी पीअ।

अर्थ- भविष्य के चिन्ता ना कईल ।

18 .आगे नाथ ना पीछे पगहा,खा मोटा के भइने गदहा।

अर्थ- मनमौजी आदमी ।

19 .आसमाने में थूकब त मुँहवे पर आई।

अर्थ- उलटा-पुलटा काम करके खुदे  फँसल ।

20 .इस्क अउरी मुस्क छिपवले से नाहीं छीपेला।

अर्थ- प्रेम अउरी  कस्तूरी केतनो छिपावल जाई बाकिर ना छुपी ।

21 .आदमी के काम हअए गलती कइल।

अर्थ- गलती  आदमी से ही होखेला  एक बार गलती के माफ़ कर देबे के चाही  ।

22 .भगवान के माया कहीं धूप कहीं छाया।

अर्थ- दुनिया में जवन कुछु होखेला उ सब भगवान के कृपा से ही होखेला ।

23 .काठे के हाड़ी बार-बार नाहीं चढ़ेला।

अर्थ- कवनो (समझदार) के  दुरुपयोग एक ही बार कईल जाला , बार-बार नाहीं।

24 .काने के कच्चा।

अर्थ- सहज विश्वासी। बिना सोचले –समझले  विश्वास ना करे के चाही ।

25 .दूनू लोक से गइले  पाड़े, ना  हलुआ मिलल न माड़े

अर्थ- धोबी का कुत्ता न घर  के  ना घाट के , केनहु के ना भईल ।

26 .घर फूटे गँवार लूटे।

अर्थ- अगर घर में फूट पड़ जाला तब एगो साधारण आदमी भी आपन उल्लू सीधा कर लेला I

27 .ना रही बाँस ना बाजी बँसुरी।

अर्थ- कवनो काम या चीज के  ओरवा दिहल ।

28 .नानी के धन,बेइमानी के धन

अउरी जजमानी के धन नाहीं रसेला।

अर्थ – ननिहाल,बेइमानी अउरी  यजमानी के

धन व्यर्थ ही जाला । यानि कवनो  काम के  ना रहेला ।

29 .नानी की आगे ननीअउरे के बखान।

अर्थ- जेकरा सगरी बात के जानकारी होखे ओकरे से उ बात बतावल ।

30.  अंडा सिखावे बच्चा के,ए बच्चा तू चेंव-चेंव करअ।

अर्थ-  जेकरा  सबकुछ मालूम होखे  ओकरे के  बतावल  यानि अज्ञानी होके  ज्ञानी के  उपदेश दिहल ।




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