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शुरू बा लोकआस्था के महापर्व छठ , आज खरना , जानी छठ पर्व के बारे में ….

चैती छठ : आस्था के  महापर्व चैती छठ शनिवार से शुरू हो चुकल बा . आज 29 मार्च के  खरना बा . आज व्रती निर्जला उपवास यानी कि बिना खाये पिए  उपवास रखिए. शाम के समय गुड़ के खीर बनाके  भगवान के  भोग अर्पित करिहे । ओकरा  बाद खुद व्रती  प्रसाद के ग्रहण करिहे . दूसरका  दिन खरना के  पूजा करत वक्त ऐह  बात के  ख्याल राखल  जरूरी होखेला  कि आसपास के  माहौल शांत होखे . खरना के दिन भक्त भगवान के  चावल के  पीठा या घी चुपड़ी रोटी के  भी भोग लगावेले .पिछलका  शनिवार के  भक्त लोग पहिलका दिने  नहाय खाय के  विधि पूरा कईले रहले . व्रती सोमवार 30 मार्च के  अस्ताचलगामी सूर्य के  अर्घ्य दिहे .
छठ पर्व साल में दु  बार आवेला . चैत्र माह, कार्तिक माह में. ऐह  पर्व के  बड़ी ही धूमधाम से मनावल जाला . इ  पर्व चार दिन तक चलेला . नहाय-खाय से लेके  उगत  भगवान सूर्य के  अर्घ्य देबे  तक चले वाला पर्व के आपन  एगो  ऐतिहासिक महत्व होखेला . ऐह  दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटा के  व्रत राखेले . व्रत के दौरान उ  पानी भी ग्रहण ना करेले .इ  त्योहार पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश औरी  नेपाल के तराई क्षेत्र में मनावल जाला. पारिवारिक सुख-समृध्दि औरी  मनोवांछित फल के  प्राप्ति खातिर इ  पर्व मनावल जाला .

खरना के  शुभ मुहूर्त:
खरना के  शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 20 मिनट से लेके  रात 8 बजकर 55 मिनट तक रहेला .

सूर्य देव औरी  छठी मैया के होखेला पूजा:
छठ पर्व में सूर्य देव के  पूजा कइल जाला भगवान सूर्य के अर्घ्य दिहल जाला .एकरा  साथे  ही छठ पर छठी मैया के  पूजा के  भी विधान बा . पौराणिक मान्यता के अनुसार छठी मैया या षष्ठी माता संतान के  रक्षा करेली . शास्त्र में षष्ठी देवी के  ब्रह्मा जी के  मानस पुत्री भी कहल गइल बा . पुराणों में इहा के  मां कात्यायनी भी कहल गईल बा ,  जेकर  पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि पर होखेला . षष्ठी देवी के  ही बिहार-झारखंड के  स्थानीय भाषा में छठ मैया कहल गईल बा.

अबकि बार छठ में लॉकडाउन के पड़ल असर :
छठ पर्व पर लोग एक साथ तालाब में एकत्र होके  भोर में सूर्य देव के  अर्घ्य देबेला  . बाकिर अबकि  बार लॉकडाउन के कारण तालाब में अर्घ्य केहू व्रती ना दे पाई . दरअसल, कोरोना वायरस के कहर के चलते अईसन कईल  उचित साबित ना  होई .




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