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पटना के बाढ़ आपदा की सरकार के गहरा नींद ?

चारु ओर पानी –पानी ओकरा बादो लोग तरस रहल बा बूंद -बूंद पानी खातिर

बिहार पटना :-  वर्षो बाद आईल पटना में भयंकर बाढ़ से भारी तबाही मचल बा . इ बाढ़ बिहार के राजधानी पटना के हालत के बदतर कर देहले बा . जवना सड़क पर फराटेदार गाड़ी चलत रहल हवे . कबो हालत अईसन हो जाई की गाड़ीयन के लम्बा लाईन लाग जाई शहर में जाम के समस्या पैदा हो जाई . ओ शहर के बाढ़ अपना आगोश में लेके पूरा राजधानी के खामोश कर देहले बा . जहा गाड़ी चलत रहल हवे उ सगरी इलाका नदी में तब्दील हो चुकल बा . गाड़ी के बदले लोग अब ओं इलाका में आए जाए खातिर नाव के सहारा ले रहल बा . आखिर ऐतना भयंकर बाढ़ के दोषी केकरा के मानल जाव . कुछ लोग ऐ भयंकर बाढ़ खातिर सरकार के जिम्मेवार मान रहल बा त कुछ लोग लोग सीधे सारा दोष प्राकृतिक के दे रहल बा . लेकिन एहिमे जे भी दोषी होखे बाकिर हमारा नजर में आम लोग भी ऐ भयंकर बाढ़ के दोषी कम नईखे . लगतार लोग अपना क्षणिक लाभ खातिर प्रकृतिक के साथे छेड़छाड़ कर रहल बा . पेड़ के अंधाधुध कटाई हो रहल बा . अब चली लोग पटना के आँखों देखा हाल के बारे में हम बता रहल बानी का बा पटना के अभी के हालात . ई सही आँखों देखल हाल बा पटना के हेलिकॉप्टर से बरसावल  जा रहल  राहत पैकेट के   संतोष तरसती निगाह से देख रहल बाड़े  . उनकरा ऐ बात के पता बा की ई राहत सामग्री उनकरा हाथे नईखे लागे वाला .पटना के  राजेंद्र नगर कॉलोनी में बारिश रुकला  के एक सप्ताह बाद भी  जलमग्न बा . हर गुज़रत दिन के साथ एहिजा  के हालात बद से बदतर हो रहल बा  .संतोष राजेंद्र नगर के पास ही रहे ले . उनकर  घर भी पानी में डूबल बा  . उ अपना  बूढ़ मांई खातिर दु दिन के खाना के  इंतज़ाम नईखन  कर सकत  .संतोष कहत रहले  की , “हम खाए-कमाए वाला  मज़दूर हई. अब न रहे खातिर कही जगहा बचल बा ना कुछु खाए खातिर हमनी के लगे बचल बा . हम कहां जाई  बड़का – बड़का  कॉलोनियन पर त ध्यान दिहल  जा रहल बा ,बाकिर हमनी के केहू पूछे वाला नईखे  .”पटना में तीन दिनों में क़रीब 35 सेंटीमीटर बारिश भईल , जवना के चलते  शहर के  अधिकतर हिस्सा पानी में डूबल बा  . गंगा पहिले से  ही ख़तरा के निशान पर बा अउरी  पुनपुन अउरी दोसरो नदी भी उफान पर बाटे .ऐसे में पानी के  निकले के आपन  प्राकृतिक रास्ता नईखे  मिल पावत . जलजमाव से  शहर में भयंकर  हालात पैदा हो चुकल बा . एकरा से निपटे खातिर ना  प्रसासन तैयार बा ना लोग .कईगो  इलाका के   पानी अब उतर चुकल बा बाकिर  राजेंद्र नगर, रामकृष्णनगर, कंकड़बाग, पाटलीपुत्रा जईसन  कईगो  इलाका  अब भी अईसन बा जहवा अभी ले भी घुटना  से ऊपर तक पानी भरल बा . ऐ इलाका में करीब पाँच लाख लोग अपना  घर में क़ैद बा अउरी  रोज़मर्रा के  ज़रूरत के समान खातिर मोहताज बा.

चारु ओर पानी – पानी , ओकरा बादो लोग  तरस रहल  बा लोग पिए खातिर बूंद – बूंद पानी

बिहार के कईगो समाजिक  संगठन से जुड़ल कईगो लोग अब किराए पर लीहल  गईल  नाव के ज़रिए पीड़ित लोग तक राहत सामग्री पहुंचा रहल बा .राहत सामान बाटे वाला लोग के कहला के अनुसार सबसे ज्यादा  क़िल्लत पीए  के पानी के बा . चारों तरफ़ पानी ही पानी बा ओकरा बादो लोग पिए के पानी खातिर तरस रहल बा  .”

पटना नगर निगम के  ओर से बाटल जा रहल  पानी के  बोतल पर लोग टूट पड़त बा .केहू के हिस्से में दुगो बोतल आ रहल बा तब केहू के दुनु हाथ रह जाता खाली .

ड्रेनेज सिस्टम की नाकामी?

राजेंद्र नगर कॉलोनी होखे  या पाटलीपुत्र, चाहे  पटना के उ  पॉश इलाका  जवना के  योजना के तहत बसावल गईल बा .ऐ सगरी इलाका में जेकरा से पूछल जा रहल बा उ लोग ईहे कह रहल बा की ई सगरी नगर निगम के नाकामी बा . ड्रेनेज व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गईल बा .”सबसे दुखद पहलू ई बा एकरा के रोकल जा सकत रहल हवे बाकिर ई प्राकृतिक आपदा ना हवे बल्कि लापरवाही के नतीजा हवे.

हलाकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ऐ हालत पर कहले की ई  प्राकृतिक आपदा हवे . बाकिर  लोग नितीश कुमार के  तर्क के  स्वीकार करे खातिर तनको  तैयार नईखे .

क्या ई  प्राकृतिक आपदा हवे ?’ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जेतना बार पटना के हालात पर बात कईल गईल उ एकरा के  प्राकृतिक आपदा से जोड़ले बाड़े . नीतीश के तर्क पर सवाल करत  प्रोफ़ेसर मौर्य कहले की  , “धूप में अगर केहू के घंटो छोड़ दिहल जाव तब उहो आदमी घाम से पीड़ित हो जाई तब घाम भी त प्राकृतिक हवे . ओकरो के प्राकृतिक आपदा से जोड़ल का ठीक रही का घाम में खड़ा आदमी के हमनी के घाम से बचे खातिर छेह के इंतजाम नईखी सन कर सकत  . जवना तरह से छेह के इंतजाम हो सकत बा ओही तरह से पानी निकाले खातिर भी इंतजाम होखे के चाही . हमनी के सरकार आपदा से निपटे खातिर पहिले से कौनो होमवर्क नईखे कईले .




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