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सेंदुर खेला के साथे बंगाली समाज के महिला लोग कईल माई दुर्गा के पूजा , नम आँख से दिहल लोग माई के अंतिम विदाई

पटना:-  पूरा बिहार भक्ति के सागर में डूबल बा । नौ दिन के नवरात्र के बाद मंगलवार के  विजया दशमी के  पर्व मनावल  जा रहल बा । दशहरा के उल्‍लास के बीच मांई  दुर्गा के मूर्ति के विसर्जन के  तैयारी भी शुरू हो गईल बा। पटना में कईगो  दुर्गा मंदिर अउरी पंडाल में बंगाली समाज के महिला लोग ‘सिंदूर खेला’ रस्‍म के साथे  मांई  दुर्गा के  आराधना कईल । मांई  दुर्गा के  भक्ति में डूबल महिला नाचल अउरी गावल लोग । रउरा लोग के बता दिहल जाव कि सिंदूर खेल के  सिंदूर होली भी कहल जाला। अबकी  बार मांई  दुर्गा के मूर्ति के   विर्सजन गंगा चाहे अउरी नदीयन में होई । मूर्ति विसर्जन करे खातिर पटना में दु – तिनगो बड़का – बड़का गढ़ा बनावल गईल बा । ओने  गया, भागलपुर, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर आदि शहर में भी महिला लोग सिंदूर खेल के  मांई  दुर्गा के पूजा  अर्चना कईल । खास‍कर भागलपुर के आदमपुर स्थित कालीबाड़ी, दुर्गाबाड़ी व सरकारीबाड़ी में भी सिंदूर खेल के मांई के  विदाई दीहल गईल ।  

बंगाली परंपरा के  समाज के  महिला लोग  निभावल

दरअसल पूरा  पटना में लगभग 1200 पंडाल में मांई  दुर्गा के मूर्ति राखल  गईल रहल हवे । काफी संख्‍या में बंगाली समाज के  ओर से भी मांई  दुर्गा के मूर्ति जगह – जगह प्रतिष्‍ठापित कईल  गईल रहल हवे । बंगाली समाज में विजया दशमी के दिन सिंदूर खेला के  रस्‍म अदायगी कईल जाला  । एकरा खातिर  मंगलवार के  पटना के बंगाली अखाड़ा, गर्दनीबाग दुर्गा मंदिर, छज्‍जू बाग स्थित पंडाल, बंगाली टोला आदि में बंगाली समाज के  महिला लोग  बंगाली परंपरा के अनुसार सेंदुर लगाके आपन रश्म निभावल ।

पति के ढेर लमहर  उम्र के  कईल जाला कामना  

बंगाली समाज के  महिला लोग  एक-दोसरा के सिंदूर लगाके पति  के लंबी उम्र के  कामना कईल । महिला लोग  बतावल  कि बंगाली समाज में चार दिन खातिर   मांई  के आँख खुलेला। षष्‍ठी पूजा के  मांई  के छठा  रूप मां कात्‍यायनी के  पूजा अर्चना के साथे  बंगाली समाज के प्रतिष्‍ठापित मांई  दुर्गा के आँख  खुल जाला । दशमी के  मां दुर्गा के  एगो  बेटी के रूप में मायका  से ससुराल खातिर  विदा कईल जाला।  




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