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नोटबंदी के बाद ओबीसी के उभरते बिजनेसमैन हुए बर्बाद : संजय स्वदेश


-ओबीसी जनजागरण संघ ने नोटबंदी की तीसरी वर्षगांठ पर इसके परिणामों की समीक्षा की मांग की
हथुआ.गोपालगंज. भाजपा सरकार में नोटबंदी की तीसरी वर्षगांठ पर ओबीसी जनजागरण संघ के संयोजक संजय स्वदेश ने कहा कि 3 साल हो गये, क्या इस बात की समीक्षा नहीं होनी चाहिये कि नोटबंदी का देश की अर्थव्यवस्था में कैसा असर रहा? यह काला धन, आतंकवाद, नक्सलवाद और राजनीति में भ्रष्टाचार को रोक पाने में कितना सफल रहा? कैशलेस इंडिया बनाने में हम कितने सफल हो पाये?
संघ की एक बैठक में संजय स्वदेश ने कहा कि नोटबंदी के कारण देश की चलती-फिरती अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा था. इसका सबसे बडा असर दलित ओबीसी वर्ग पर पडा है. उनके छोटे छोटे रोजी रोजगार चौपट हो गए. दलित ओबीसी में उभरते हुए बिजनेश मैन का धंध चौपट हो गया. आज देश में जीडीपी की विकास दर घट गई है. बेरोजगारी बढ़ कर 8.5 प्रतिशत हो गई है. मंदी छाई हुई है. नोटबंदी के बाद जीएसटी लागू कर अर्थव्यवस्था को और चौपट कर दिया. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 6 प्रतिशत तथा कृषि क्षेत्र में 2 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है. कलेक्शन न होने से दो लाख करोड़ का राजकोषिय घाटा है.
संजय स्वदेश ने कहा कि नोटबंदी की तीसरी वर्षगांठ पर इसके परिणामों की समीक्षा कर सरकार को इस पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए.




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